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बाबा साहेब की रो रही होगी आत्मा, 5 साल में बढ़े दलित अपराध के मामले, आंकड़ों पर एक नजर

राजस्थान एक बार फिर दलित उत्पीड़न के कारण सुर्खियों में है। स्कूल में पानी की बाल्टी छूने के कारण आठ साल के मासूम को बेरहमी से पीटने के मामले में पुलिस कार्रवाई का आश्वासन तो दे रही है, लेकिन चौथी कक्षा में पढ़ने वाला यह बच्चा इतना आतंकित है, कि उसने स्कूल जाना ही छोड़ दिया है। अलवर जिले के इस मामले में स्थानीय पुलिस ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ जांच हो रही है, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर ने भरोसा दिलाया कि लड़का स्कूल जा सकता है, उसे अब कोई परेशानी नहीं होगी। घटना के संबंध में आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्कूल परिसर में लगे हैंडपंप पर पानी पीने गया बच्चा वहां रखी बाल्टी छूने के कारण बर्बरता और दमन की मानसिकता का शिकार हो गया। पानी भर रहा शख्स कथित तौर पर ऊंची जाति का है। बेटे की पिटाई के बाद पिता ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की। सर्किल इंस्पेक्टर सवाई सिंह के मुताबिक अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
प्रति 10 हजार लोगों पर 6 से अधिक अपराध के मामले
इंसानियत को शर्मसार करने वाली अलवर जिले की इस घटना के बहाने एक नजर उन घटनाओं पर जहां राजस्थान के गौरवशाली इतिहास और विरासत पर कलंक लगा। कलंक लगने का कारण दलितों के खिलाफ अपराध दर है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक साल 2021 में प्रति 10 हजार लोगों की आबादी पर 6 से अधिक अपराध के मामले दर्ज किए गए। एक लाख की आबादी पर यह संख्या 60 से अधिक हो जाती है। एनसीआरबी के मुताबिक दलित आबादी के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज होने का राष्ट्रीय औसत 25 है। यानी प्रति एक लाख की आबादी में 25 मामले। इसी साल यूपी में प्रति एक लाख पर 31 ऐसे मामले दर्ज किए गए।
सबसे अधिक मामले उत्तर प्रदेश में
'क्राइम इन इंडिया 2021' टाइटल के साथ प्रकाशित इस रिपोर्ट के मुताबिक पूरे भारत में अनुसूचित जातियों, या दलितों, के खिलाफ सबसे अधिक संदिग्ध अपराध के मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए।
राजस्थान के अलावा एमपी में भी हो रहा उत्पीड़न
2021 में दलितों के खिलाफ उच्चतम अपराध दर (प्रति लाख जनसंख्या पर) के मामले में राजस्थान के साथ मध्य प्रदेश भी सबसे आगे रहा। साल 2016 से 2020 तक दलितों के खिलाफ हुए अपराधों की औसत दर की गणना करने पर राजस्थान और मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति के सदस्यों के खिलाफ अपराध दर में सबसे अधिक बढ़ा है।
दलितों के उत्पीड़न मामले में किन आरोपों को गिनती है पुलिस
अनुसूचित जाति के खिलाफ किए गए अपराधों/अत्याचारों के रिपोर्टेड मामलों (NCRB डेटा के मुताबिक) के बारे में यह जानना भी अहम है कि इस दायरे में केवल उन्हीं मामलों को गिना गया है जो पुलिस के रिकॉर्ड्स में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून, 1989 (एससी/एसटी एक्ट) के तहत दर्ज किया गया है। अगर पुलिस ने किसी दलित के खिलाफ अत्याचार का मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज किया हो, तो एनसीआरबी ने उसे दलित उत्पीड़न के दायरे में नहीं रखा है। एनसीआरबी के मुताबिक ऐसा इसलिए क्योंकि उन मामलों में अनुसचित जाति के ही किसी सदस्य द्वारा किसी और एससी / एसटी के खिलाफ किये गए अपराध का उल्लेख होता है।
दलितों के उत्पीड़न से जुड़ी कुछ अहम तथ्य बिंदुवार पढ़ें-
- भारत में साल 2021 में हर घंटे दलितों के खिलाफ छह अपराध।
- 2021 में कुल मामलों की संख्या बढ़कर 50,900 तक पहुंची।
- उत्तर प्रदेश ने दलितों के खिलाफ सबसे अधिक (13,146) अपराध के मामले।
- दलितों के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज होने के संबंध में दूसरे से चौथे नंबर पर क्रमश: राजस्थान (7,524), मध्य प्रदेश (7,214), और बिहार (5,842) है।
- साल 2011 की जनगणना के मुताबिक उत्तर प्रदेश में देश में दलितों की सबसे अधिक (4 करोड़ से प्लस) आबादी।
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