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INS Arihant Submarine से Ballistic Missile का सफल प्रक्षेपण, स्वदेशी तकनीक में बड़ी छलांग, डॉ मनमोहन सिंह से कनेक्शन !

INS arihant submarine
INS Arihant Submarine से Ballistic Missile लॉन्च की गई। भारत की स्वदेशी तकनीक के मामले में ये बड़ी छलांग है। INS Arihant Submarine भारत की स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी है। शुक्रवार को INS अरिहंत से पनडुब्बी से लॉन्च की गई बैलिस्टिक मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण बंगाल की खाड़ी में किया। बंगाल की खाड़ी में पनडुब्बी से लॉन्च की गई बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) का सफल प्रक्षेपण होने के साथ ही लक्ष्य को भी उच्च सटीकता के भेदा गया। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, मिसाइल का पूर्व निर्धारित सीमा तक परीक्षण किया गया। बंगाल की खाड़ी में मिसाइल ने लक्ष्य को बहुत उच्च सटीकता के साथ भेदा। हथियार प्रणाली के सभी परिचालन और तकनीकी मानकों की पुष्टि की गई है।

परमाणु पर भारत की नीति

बकौल रक्षा मंत्रालय, आईएनएस अरिहंत SLBM का सफल प्रक्षेपण भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का एक प्रमुख तत्व है। यूजर ट्रेनिंग लॉन्च चालक दल की योग्यता साबित करने और सामरिक स्ट्राइक न्यूक्लियर सबमरीन (Strategic Strike Nuclear Submarines alias SSBN) कार्यक्रम की पुष्टि करने के मद्देनजर भी महत्वपूर्ण है। मंत्रालय ने कहा, "एक मजबूत, जीवित और सुनिश्चित प्रतिशोध क्षमता 'विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध' की भारत की नीति को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इससे परमाणु के संदर्भ में भारत की 'पहले उपयोग नहीं' प्रतिबद्धता को रेखांकित होती है।"

डॉ मनमोहन सिंह से कनेक्शन

बता दें कि आईएनएस अरिहंत को 26 जुलाई 2009 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लॉन्च किया था। अगस्त 2013 में, पनडुब्बी के परमाणु रिएक्टर को सक्रिय किया गया था। सामरिक स्ट्राइक न्यूक्लियर सबमरीन (SSBNs) को भारत जैसे देश के लिए सबसे विश्वसनीय प्लेटफॉर्म माना जाता है। परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के लिए भारत 'नो फर्स्ट स्ट्राइक पॉलिसी' को फॉलो करता है।

समुद्री सुरक्षा, भारत, रूस और चीन

यह भी दिलचस्प है कि भारत ने अपने परमाणु पनडुब्बी शस्त्रागार को बढ़ाने का भी फैसला किया है। भारत चार और SSBN अपने बेड़े में शामिल करेगा। इसके साथ-साथ छह परमाणु-संचालित सबमर्शिबल शिप न्यूक्लियर (SSN) जैसे INS Chakra परमाणु पनडुब्बियों को रूस से अलग-अलग अवसरों पर पट्टे पर लिया है। बता दें कि पनडुब्बियां मुख्य रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी नौसेना की परमाणु पनडुब्बियों की बढ़ती उपस्थिति के मद्देनजर जवाबी तैयारी के रूप में कार्य करेंगी।
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