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  • April 24, 2024
  • Last Update April 12, 2024 4:42 pm
  • Noida

Rama Ekadashi 2022, व्रत पूजन से करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न

Rama Ekadashi 2022, व्रत पूजन से करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न

Rama Ekadashi हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार आसो कृष्णपक्ष) की एकादशी तिथि को ‘ रमा एकादशी’ )Rama Ekadashi) कहते हैं।

एकादशी तिथि (Rama Ekadashi) 20 अक्टूबर 2022, गुरुवार शाम 04 बजकर 04 मिनट से प्रारंभ होकर 21 अक्टूबर 2022, शुक्रवार शाम 05 बजकर 22 मिनट पर समाप्त हो रही है।
एकादशी तिथि पारण

22 अक्टूबर 2022, शनिवार सुबह 06.30 से 08.45 तक है। ऐसे में उदया तिथि की मान्यता के अनुसार, रमा एकादशी का व्रत 21 अक्टूबर 2022 ,शुक्रवार के दिन रखें
इस तरह एकादशी का नाम पड़ा रमा एकादशी।

चतुर्मास की यह अंतिम एकादशी (Ekadashi) मानी जाती है। रमा एकादशी के बाद देवउठनी एकादशी आती है और चातुर्मास का अंत हो जाता है। साथ ही दिवाली से पहले रमा एकादशी के दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने का सबसे अच्छा मुहूर्त माना जाता है और इस दिन के उपवास से ही माता लक्ष्मी की आराधना शुरू हो जाती है, जो दिवाली पूजन तक चलती है।

माता लक्ष्मी को रमा भी कहा जाता है इसलिए कार्तिक मास (Kartik Maas) की इस एकादशी को भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, मां लक्ष्मी के नाम पर ही इस एकादशी को ‘ रमा एकादशी’ कहा जाता है।

इस व्रत को करने से प्रभु श्री हरि विष्णु के साथ साथ मां लक्ष्मी का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि का वास होगा

एकादशी व्रत के नियम

जो लोग उपवास नहीं रखते हैं, वे लोग भी एकादशी के दिन चावल और उससे बने पदार्थ का सेवन नहीं करते.

रमा एकादशी व्रत पूजा विधि

एकादशी का व्रत दशमी तिथि की संध्या से ही शुरू हो जाता है। इस दिन सूर्यास्त से पहले भोजन कर लेना चाहिए। इसके बाद एकादशी तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान व ध्यान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद पूजा की तैयारियां शुरू कर दें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान कृष्ण की मूर्ति या तस्विर पर गंगाजल से छिड़काव करें और रोली व अक्षत से टीका करें। इसके बाद देशी घी का दीपक जलाएं और फूलों से मंदिर को सजाएं।

रमा एकादशी (Rama Ekadashi) पर भगवान कृष्ण की पूजा करने का विधान है। कृष्ण जी को माखन-मिश्री अच्छी लगती है इसलिए उनको भी यही भोग लगाएं।धूप-दीप से भगवान की पूजा करने के बाद विष्णु सहस्रनाम या प्रभु श्री विष्णु के मंत्रों का पाठ करना उत्तम रहेगा। इसके बाद तुलसी पूजन करें। दिन भर मन को शांत रखकर भगवान का स्मरण करते रहें और श्रीमद् भगवदगीता पाठ भी करते रहें या सुनते रहे।

शाम के समय श्रीकृष्ण की फिर से पूजा करें और भोग लगाएं। इसके बाद भोग को सभी में बांट दें। अगले दिन पूजा-पाठ और दान-दक्षिणा देकर ब्राह्मणों को घर पर बुलाकर भोजन करवाएं और फिर खुद पारण करें।

रमा एकादशी का महत्व

एकादशी को पुण्य कार्य करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान विष्णु को सभी व्रतो में एकादशी सबसे प्रिय है और रमा एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की साथ पूजन करने से इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

पद्म पुराण में बताया गया है कि जो भी भक्त सच्चे मन से ‘रमा एकादशी’ का उपवास रखता है, उसे बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है और सभी समस्याओं से मुक्ति भी मिलती है। पुरातन ग्रंथों में बताया गया है कि भगवान कृष्ण ने रमा एकादशी के बारे में धर्मराज युद्धिष्ठिर से कहा था कि इस एकादशी का सच्चे मन से व्रत करने से वाजपेय यज्ञ के बराबर फल मिलता है।

आध्यात्मिक सलाहकार -रविश द्विवेदी

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