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  • July 13, 2024
  • Last Update June 22, 2024 7:38 am
  • Noida

Mulayam Singh Yadav का 11660 नंबर से क्या कनेक्शन है ?

Mulayam Singh Yadav का 11660 नंबर से क्या कनेक्शन है ?

Mulayam Singh Yadav अब हमारे बीच नहीं हैं। उनसे जुड़े हुए स्मृतियों को शेयर किया जा रहा है। राजनीतिक जगत से जुड़े लोग मुलायम सिंह यादव के निधन पर शोक जताने के साथ मुलाकात और राजनीतिक अनुभव का जिक्र कर उनकी पर्सनालिटी से युवा पीढ़ी को रूबरू कराने का प्रयास भी कर रहे हैं। यह जानना दिलचस्प है कि मुलायम सिंह यादव का 11660 नंबर से क्या खास कनेक्शन है ? दरअसल यह पांच अंकों का कोई साधारण नंबर नहीं बल्कि यह उन हजारों दिनों की गिनती है जब मुलायम सिंह यादव ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा गिराने पहुंचे कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया था।

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गौरतलब है कि मुलायम सिंह यादव ने साल 1990 के 30 अक्टूबर के दिन उत्तर प्रदेश की पुलिस को आदेश दिया था कि अयोध्या के बाबरी मस्जिद ढांचे को गिराने पहुंचे कारसेवकों को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बिगड़ने पर हालात को संभालने के लिए गोलियां चलाई जाएं। लाखों कारसेवक विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के आह्वान पर अयोध्या में जुटे थे। कानून व्यवस्था बिगड़ने और स्थिति गंभीर होने पर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने पुलिस को आदेश दिया की बाबरी मस्जिद की ओर बढ़ रहे कारसेवकों पर गोलियां चलाई जाएं।

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30 अक्टूबर 1990 के दिन मुलायम सिंह यादव ने यह आदेश ऐसे समय में जारी किया जब लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा समाप्त होने वाली थी। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर में रथ यात्रा करने निकले आडवाणी अयोध्या में यात्रा समाप्त करने वाले थे। कारसेवक बड़ी संख्या में अयोध्या में जमा हुए थे। राम मंदिर निर्माण का आंदोलन जोर पकड़ रहा था, लेकिन 30 अक्टूबर 1990 को जब मुलायम सिंह यादव ने गोलियां चलाने का आदेश जारी किया वह दिन आज भी कठघरे में है। उस दिन से मुलायम सिंह के निधन तक यानी 10 अक्टूबर 2022 तक 11660 दिन बीत गए लेकिन, यह घटना मुलायम सिंह यादव के नाम के साथ हमेशा के लिए नत्थी हो गई।

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इंडिया टुडे डॉट इन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अयोध्या में जब मुलायम सिंह यादव के आदेश पर गोलियां चलाई गई उस समय केंद्र में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार थी। जनता दल के आंतरिक टकराव के कारण केंद्र सरकार पर खतरा मंडरा रहा था। इसी दौरान मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री थे और वह भी जनता दल में ही थे। बाद में उन्होंने समाजवादी पार्टी का गठन किया। दिलचस्प यह कि जनता दल ने आरएसएस, बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद के राम मंदिर आंदोलन का सख्त विरोध किया था। अक्टूबर 1990 में अयोध्या पहुंचने से पहले मुलायम सिंह यादव ने ऐलान किया था,

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आडवाणी अयोध्या में प्रवेश नहीं कर सके थे। बिहार में लालू प्रसाद यादव ने आडवाणी को गिरफ्तार करा दिया था। अयोध्या में Mulayam Singh Yadav के आदेश पर कारसेवकों पर गोली चलाने का प्रकरण कितना गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से होता है कि पुलिस पर लोगों को घरों से बाहर खींचकर गोली मारने के आरोप लगे। इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि 2 नवंबर 1990 के दिन राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवादित भूखंड के पास बने हनुमानगढ़ी मंदिर में दो लाशें बरामद की गई थीं।

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निधन के 5 वर्ष पहले 2017 में मुलायम सिंह यादव ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए 30 अक्टूबर 1990 के आदेश को जायज करार दिया था। उन्होंने कहा था कि उनके और पूर्व पीएम अटल बिहारी बाजपेयी के बीच संवाद हुआ था। इंडिया टुडे के रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने मुलायम सिंह यादव के साथ कारसेवकों की मौत की संख्या पर चर्चा के दौरान 56 लोगों की मौत का दावा किया था, लेकिन मुलायम सिंह यादव ने मृतकों का आंकड़ा 28 बताया। Mulayam Singh Yadav ने एक अन्य मौके पर कहा था कि कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश देना दुखद था लेकिन यह सख्त फैसला उन्हें देश हित में करना पड़ा।

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बहरहाल इस घटना को आज करीब 32 साल बीत चुके हैं। हालांकि, संयोग ऐसा कि 32 साल पूरे होने में 20 दिन बाकी हैं और मुलायम सिंह यादव ने अंतिम सांस ले ली। 30 अक्टूबर को गोली चलाने का आदेश दिया गया और 10 अक्टूबर 2022 के दिन पिछले लगभग 32 साल की अवधि 11660 दिनों की होती है। भले ही मुलायम सिंह यादव हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन अक्टूबर 1990 का अयोध्या में गोली चलाने के आदेश वाला फैसला आज तीन दशकों बाद भी कठघरे में है।

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