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  • May 22, 2024
  • Last Update April 12, 2024 4:42 pm
  • Noida

Sanskriti Sansad Varanasi का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुभारंभ, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल समेत धर्म जगत के बड़े आचार्य रहे मौजूद

Sanskriti Sansad Varanasi का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुभारंभ, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल समेत धर्म जगत के बड़े आचार्य रहे मौजूद

Sanskriti Sansad Varanasi का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला समेत धर्माचार्यों ने संयुक्त रूप से संस्कृति संसद का उद्घाटन किया। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में संस्कृति संसद 2023 का आयोजन किया जा रहा है। संसद की शुरुआत के साथ-साथ शुभंकर का लोकार्पण भी किया गया।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और कई धर्माचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलन कर समारोह का उद्घाटन किया। अखिल भारतीय संत समिति के महामन्त्री स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो नागेंद्र पांडेय समेत कई लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में महात्मा गांधी की मूर्ति पर माल्यार्पण भी किया गया।

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘हर हर महादेव’ के जयघोष के साथ की। उन्होंने कहा कि काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी है। इस पवित्र भूमि पर संस्कृति संसद का आयोजन ऐतिहासिक है। उन्होंने विश्वास जताया कि संसद अपने उद्देश्यों में निश्चित ही सफल होगी।

गवर्नर शुक्ला ने कहा, इस आयोजन के बाद विश्व को एक संदेश मिलेगा। भारत अपने ज्ञान और कौशल के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों समाधान भी भारत के पास है। उन्होंने कहा, काशी सनातन की नगरी है और इस संस्कृति को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।

अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती ने अपने संबोधन में कहा कि इस संसद के आयोजन में 127 संप्रदायों के संतों का काशी आगमन हो रहा है। उन्होंने तमिलनाडु के डीएमके विधायक उदयनिधि स्टालिन का नाम लिए बिना कहा, सनातन उन्मूलन की बात तथाकथित लोग कर रहे हैं। इस संस्कृति संसद के माध्यम से हम सनातन विजय के लक्ष्य को हासिल करेंगे।

उन्होंने कहा कि टूलकिट के माध्यम से सनातन धर्म पर हमले किये जा रहे हैं। मुंहतोड़ जवाब देने के लिए इस संसद का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की एकता, अक्षुण्ण रखने के मकसद से इस संसद का आयोजन किया गया है।

Sanskriti Sansad

संसद में शिरकत करने पहुंचे चकिया विधायक कैलाश खरवार ने कहा कि हमारे धर्म पर उंगलियां उठाई जा रही है। समय-समय पर राजनीतिक समाज के लोग एकजुट होकर इसकी रक्षा करते रहे है। वनवासी समाज के लोगों को बरगलाया जा रहा है। ऐसे में इस तरह के आयोजन से सभी के भीतर जागरूकता पैदा की जा सकती है।

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि संस्कृति को एक उत्सव के रूप में मनाने के लिए हम एकत्र हुए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन से आज के युवा वर्ग जुड़ रहे है। लोगों के बीच जागरूकता आई है। भारत को ज्ञान के संस्था के रूप में स्थापित करना मुख्य उद्देश्य है। भारत आज विश्व गुरु बनने के मार्ग पर प्रशस्त है।

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महामहिम राज्यपाल शुव प्रताप शुक्ल को पुस्तक भी भेंट की गई। समारोह में प्रमुख रूप से अखिल भारतीय संत समिति के महामन्त्री स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती, काशी विद्वत परिषद् के अध्यक्ष पद्मभूषण प्रो वशिष्ठ त्रिपाठी, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो नागेंद्र पांडेय, चकिया विधायक कैलाश खरवार, पूर्व ब्लॉक प्रमुख धानापुर संयोजक देवेन्द्र प्रताप सिंह ने भाग लिया।

गंगा महासभा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष जयप्रकाश मिश्र, काशी पातालपुरी पीठाधीश्वर बालक दास जी महाराज, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रोफेसर आनंद कुमार त्यागी, आयोजन समिति के सचिव सिद्धार्थ सिंह के साथ साधु संत और समाज के अन्य गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीकाशी विद्वत परिषद् के अध्यक्ष पद्मभूषण प्रोफेसर वशिष्ठ त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम का संचालन गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामन्त्री (संगठन) गोविंद शर्मा और धन्यवाद ज्ञापन श्री काशी विद्वत परिषद् के महामन्त्री प्रो राम नारायण द्विवेदी ने किया। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय सन्त समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् एवं श्रीकाशी विद्वत परिषद् के मार्गदर्शन में गंगा महासभा के द्वारा संस्कृति संसद का आयोजन किया जा रहा है।

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