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  • May 21, 2024
  • Last Update April 12, 2024 4:42 pm
  • Noida

क्या लोकसभा चुनाव पर दिखेगा कर्नाटक के नतीजों का असर, 2024 में क्या होगी राजनितिक दलों का रणनीति? जानिए हर अहम बात

क्या लोकसभा चुनाव पर दिखेगा कर्नाटक के नतीजों का असर, 2024 में क्या होगी राजनितिक दलों का रणनीति? जानिए हर अहम बात

हाल में संपन्न हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद कांग्रेस ने एक बार फिर से वहां अपने दम पर सरकार बना ली. इतना ही नहीं कर्नाटक में जीत के साथ कांग्रेस के वोट प्रतिशत भी बढ़ गया है. आमतौर पर देश की राजनीतिक दिशा तय करने में उत्तर भारतीय राज्यों की भूमिका अहम रहती है. ऐसे में सवाल उठता है कि कर्नाटक के चुनावी नतीजे क्या देश की चुनावी राजनीति पर कोई छाप छोड़ सकेंगे ? क्या 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए कर्नाटक के वोटरों ने कोई संदेश दिया है?

हालांकि, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि कर्नाटक के परिणामों ने कांग्रेस में नई जान फूंक दी है. माना जा रहा है कि इस के असर इस साल होने वाले राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा. हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन कर्नाटक में कांग्रेस को मिली बड़ी जीत ने भाजपा में मौजूद कई खामियों को उजागर किया है.

ऐसे में अगर बीजेपी इन खामियों को दूर करने में विफल रहती है, तो इसमें कोई शक नहीं है कि उसे अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में बड़ा नुकसान हो सकता है. वहीं, अगर पार्टी इन खामियों को दूर करने में सफल होती है, तो बेशक वह एक बार फिर सत्ता में वापसी कर सकती है. हालांकि, यह इतना आसान होने वाला नहीं है.

दरअसल, कर्नाटक चुनाव में भाजपा का डबल इंजन की सरकार के दावा फुस्स साबित हुआ था. इसकी सबसे बड़ी वजह कमजोर स्थानीय नेतृत्व रहा. इससे पहले बीजेपी को हिमाचल प्रदेश में भी कमजोर स्थानीय नेतृत्व के कारण हार का मुंह देखना पड़ा था. वैसे देखा जाए, तो उत्तर प्रदेश को छोड़ दें, तो लगभग हर राज्य में बीजेपी मजबूत का स्थानीय नेतृत्व बौना दिखाई देता है. बीजेपी की ली़डरशिप इतनी कमजोर दिखाई देती है कि उसे मोदी फैक्टर भी काउंटर करने में संघर्ष करता नजर आ सकता है.

वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस ने राज्यों के चुनाव को स्थानीय मुद्दों पर लड़ने की नीति अपना ली है। बीजेपी को इसका काट नहीं मिल रहा है। ऐसे में सिर्फ मोदी लहर के भरोसे चुनाव जीतना भाजपा के लिए मुश्किल हो सकता है.

अगर बात करें दक्षिण की तो पिछले कुछ सालों में माना जा रहा था कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बीजेपी कांग्रेस की जगह बीजेपी ले ही है, लेकिन अब कांग्रेस ने अपनी जगह हासिल करने की ओर कदम बढ़ा दिया है.

पिछले कुछ सालों में देखने को मिला है कि चुनाव में बीजेपी मुद्दे सेट करती थी और दूसरी पार्टियां उनमें उलझी रहती हैं, लेकिन इस बार मुद्दे कांग्रेस सेट कर रही है और बीजेपी उन पर रिएक्ट कर रही है.

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इसके अलावा लोकसभा चुनाव से पहले सभी विपक्षी दलों को एक करने की कवायद चल रही है. ऐसे में अगर कांग्रेस कर्नाटक में हार जाती तो यह विपक्षी एकता के लिए झटका होता. कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के साथ सभी विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की मुहिम और जोर पकड़ेगी. इसके अलावा इस जीत से राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का वजन बढ़ सकता है. ऐसे में अगर विपक्षी पार्टियां भाजपा के खिलाफ आम चुनाव तक एकजुटता बनाए रखने में कामयाब रहती हैं, तो यह बीजेपी के लिए नुक्सानदेह हो सकता है.

कर्नाटक में कांग्रेस ने 200 यूनिट बिजली मुफ्त, महिलाओं के लिए सस्ते गैस सिलिंडर और फ्री यात्रा जैसे मुद्दे उठाए थे. इसके अलावा उसने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का वादा भी था. वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस के इन वादों पर सवाल उठाए थे. ऐसे में सवाल उठता है कि अन्य पार्टियों पर चुनावी रेवड़ी बांटने का आरोप लगाने वाली बीजेपी लोकसभा चुनावी में इसी तरह वादे कर सकती है?

कर्नाटक में हुए चुनाव में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद से जुड़े भावनात्मक मुद्दों पर स्थानीय मु्द्दे भारी पड़े. इसके अलावा कर्नाटक चुनाव के अंतिम चरण में बजरंग बली से लेकर द केरल स्टोरी कम्युनल मुद्दे उठाए गए, लेकिन जमीन पर इनका कोई असर नहीं पड़ा. कर्नाटक में महंगाई, बेरोजगारी और करप्शन अहम रहे. ऐसे में यह बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए मैसेज है कि वह आम चुनाव के लिए अपनी रणनीति में बदलाव करें.

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