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  • April 24, 2024
  • Last Update April 12, 2024 4:42 pm
  • Noida

Nawazuddin Siddiqui Birthday: इन एक्टर्स से इनसिक्योर महसूस करते हैं नवाजुद्दीन, कहा- पसीने छूट जाते हैं

Nawazuddin Siddiqui Birthday: इन एक्टर्स से इनसिक्योर महसूस करते हैं नवाजुद्दीन, कहा- पसीने छूट जाते हैं

नवाजुद्दीन सिद्दीकी के बारे में अक्सर यह बात कही जाती है कि वो जब भी स्क्रीन पर आते हैं, तो सामने वाले एक्टर्स को खा जाते हैं. ऐसे में जाहिर सी बात है कई एक्टर्स उनसे इनसिक्योर महसूस करते हैं. क्या वाकई में इस बात में सच्चाई है. इस पर नवाज बेहद मजेदार अंदाज में जवाब देते हुए कहते हैं, ऐसा है कि फिल्म करते वक्त उन्हें ऐसा बिलकुल भी नहीं लगता है. फिल्म जब रिलीज होती है, तब उन्हें पता चलता है.

नवाज ने क्या कहा?
नवाज आगे कहते हैं, मेरी जो पर्सनैलिटी है, वो 5 फुट 6 इंच की है. जब मैं किसी के सामने होता हूं न, तो उनको लगता है कि अरे ये तो इतना एवरेज सा है, इसे दो मिनट में ही पी जाऊंगा. मैं उस वक्त उन्हें ऐसा महसूस करने भी देता हूं. मेरे साथ जिन्होंने भी काम किया है, उन्हें कभी डर नहीं लगा था. मैंने उसे चैलेंज की तरह लिया भी था. फिर बाद में जो होता है, वो सबको पता है. हंस देते हैं..

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नवाज को किस एक्टर से इनसिक्योरिटी होती है? जवाब में कहते हैं, कुत्ते से बिल्ली से.. नॉन एक्टर से.. मुझे वाकई में नॉन एक्टर से बहुत डर लगता है. अगर किसी हलवाई को लेकर आए, तो वो स्क्रीन पर वो ही करेगा जो करता आया है, बस वैसे लोगों के सामने एक्टिंग करने से डर लगता है. क्योंकि वो तो बहुत रियल है, वो अपना काम जानता है और उसे ही प्ले कर रहा है. उनकी अनकन्वेंशनल से डर लगता है. आप उसके मेथड से वाकिफ नहीं हैं, उसकी डायलॉग डिलीवरी नहीं पता है. वो कहां पॉज लेगा कैसे बोलेगा.. बिलकुल अनप्रेडिक्टिबल सा होता है.

वहीं नवाज अपने कुछ पंसदीदा एक्टर्स की तारीफ में कहते हैं, मेरे कुछ समकालीन एक्टर्स हैं, जिनके काम को पसंद करता हूं. मनोज बाजपेयी भाई का काम कमाल का है. राजपाल यादव मेरे पसंदीदा एक्टर हैं. विजय राज का काम पसंद है. पंचायत जब देखी, तो उसमें जो दो एक्टर हैं, उनकी सहजता ने मुझे काफी प्रभावित किया था.

बतौर एक्टर अपनी जर्नी पर कहते हैं, मैं हमेशा से ऐसे किरदारों की तलाश में रहता हूं, जिससे मैं सरप्राइज हो जाऊं. इसके अलावा मुझे ह्यूमन माइंड के अंदर चलने वाले वो सारे थॉट्स को समझते हुए अपना कोई किरदार गढ़ना है. आपको पता नहीं होता है कि एक इंसान किस हद तक सोच सकता है. उसके दिमाग के थॉट्स कई बार उसे ही हैरान कर जाते हैं.

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